The man born in a Kuhu Yoga will be bereft of mother, vehicles, friends, happiness, ornaments and relations, will be without a situation or house having lost the one already got, and will be attached to a low female.
यदि लग्न से चौथा घर या चतुर्थेश अशुभ ग्रहों से युत या वीक्षित हो और चतुर्थेश ६, ८, १२ इन स्थानों में से किसी में हो, तो कुहु योग होता है। जो इस योग में उत्पन्न हो उसे माता, सवारी, मित्र, आभूषण तथा बन्धुओं का सुख प्राप्त नहीं होता। चौथा घर सुख स्थान कहलाता है और इस घर के बिगड़ जाने से मनुष्य सुखहीन होता है। ऐसे व्यक्ति को कहीं आश्रय नहीं मिलता — कोई न कोई संकट ऐसा उपस्थित हो जाता है कि अपना स्थान छोड़ना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति कुस्त्री (ख़राब औरत) में अभिरत होता है। संक्षेप में चौथे घर से जिन बातों का विचार किया जाता है उन सबके कारण क्लेश उठाना पड़ता है। चौथे घर से स्त्री का विचार नहीं किया जाता — सुख का विचार किया जाता है। कुस्त्री में रत होना सबसे बड़े क्लेश की जड़ है। यद्यपि मन्त्रेश्वर महाराज ने यह नहीं लिखा है, परन्तु हमारा अनुभव है कि शनि यदि चौथे घर में हो और चौथे घर का मालिक भी बिगड़ा हो तो बुढ़ापा बहुत दरिद्रता में बीतता है। साथ वाली कुण्डली एक ऐसे सज्जन की है जिन्होंने विलायत की यात्रा की और लन्दन के सुप्रसिद्ध सेवॉय होटल में ठहरे; जवानी में बड़े-बड़े बाग़ वाली आलीशान कोठियों में रहे, परन्तु बुढ़ापा घोर दरिद्रता में बिता रहे हैं।
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