HomeLibraryPhaladeepikaCh.6Verse 50
Phaladeepika
Chapter 6 · yogādhyāya · योगाध्याय · Verse 50
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
शत्रून् बलिष्ठान् बलवन्निगृह्य क्रूरप्रव्त्त्या सहितोऽभिमानी ।
व्रणङ्कितङ्गश्च विवादकारी स्यादस्त्रयोगे दृढगात्रयुक्तः
IAST Transliteration
śatrūn baliṣṭhān balavannigṛhya krūrapravttyā sahito'bhimānī | vraṇaṅkitaṅgaśca vivādakārī syādastrayoge dṛḍhagātrayuktaḥ
TranslationsTwo-source verified
English

The person who has his birth in the Astra Yoga will forcibly subdue his very powerful foes. He will be rough in his behaviour and arrogant. He will have bruised limbs, but will possess a strong body. He will be quarrelsome.

Hindi

यदि छठे भाव का स्वामी अस्त न होकर स्वराशि या उच्चराशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में बैठा हो और छठा भाव शुभ ग्रह युत या शुभ ग्रहों से वीक्षित हो तो अस्त्र योग होता है। साधारणतः छठा स्थान दुःस्थान या निकृष्ट स्थान समझा जाता है, किन्तु छठे का स्वामी छठे में हो तो इसे ख़राब नहीं कहेंगे क्योंकि वह स्वगृही हुआ। प्रायः ज्योतिषी कहा करते हैं कि छठे ग्रह में पाप ग्रह का होना अच्छा है — 'षष्ठे पापाः वित्तलाभं प्रकुर्युः' — उनके कथन का आधार यह होता है कि छठा शत्रु स्थान है; पाप ग्रह शत्रुओं का नाश करेगा इसलिये उत्तम है। यह भी प्रसिद्ध उक्ति है कि ३, ६, ११ इन स्थानों में मंगल, शनि, राहु हो तो उत्तम हैं — इसका भी आशय यही है कि पाप ग्रह छठे में रहकर शत्रु और रोग को नष्ट करेगा। अब मन्त्रेश्वर महाराज का मत लीजिये — वे इस सिद्धान्त को पकड़ते हैं कि किसी भाव का सुख तभी प्राप्त होता है जब भावेश बलवान हो — पहली बात। इसमें तो किसी को आपत्ति हो ही नहीं सकती। किन्तु दुःस्थान का स्वामी किसी दुःस्थान में बैठे तो भी अच्छा ही माना जाता है — यह बात फलदीपिका में भी आगे इसी अध्याय के ५७वें श्लोक में बताई गई है। जो अस्त्र योग में पैदा होता है वह बड़े-बड़े बलवान् शत्रुओं को अपनी ज़बरदस्त ताक़त से दबा देता है। बहुत क्रूर प्रवृत्ति वाला अभिमानी होता है। ऐसे व्यक्ति के शरीर के अवयव दृढ़ (मज़बूत) होते हैं; किन्तु शरीर में व्रण के चिह्न भी होते हैं। अस्त्र योग में उत्पन्न व्यक्ति विवादकारी होता है।

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