The person born in the Jaladhi or Ambudhi Yoga will be rich in cattle, wealth and corn, will have a beautiful mansion full of relations, an excellent wife, gems, clothes and ornaments. Further, he will hold a respectable and high position. His happiness will be steady and lasting. He will travel on elephants, horses and vehicles. He will be honoured by Kings. He will eagerly engage himself in doing work for Brahmins and the Gods and in sinking wells and tanks by the road side.
यदि चतुर्थ स्थान में शुभ ग्रह हों या शुभ ग्रह चौथे स्थान को देखते हों, चतुर्थेश अस्त न हो और अपनी स्वराशि या उच्चराशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में हो तो अम्बुधि या जलधि योग होता है। अम्बुधि या जलधि समुद्र को कहते हैं। इस योग में उत्पन्न मनुष्य को गो-सम्पत्ति (गाय, बैल आदि), धन-धान्य आदि पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होते हैं। इसका मकान बहुत सुन्दर होता है। बन्धुओं की बहुतायत रहती है अर्थात् बन्धुओं से सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्त्री, रत्न, वस्त्र, भूषण आदि के साथ-साथ आदरणीय उत्तम स्थान प्राप्त होता है। ऐसे मनुष्य का सुख स्थिर होता है अर्थात् दीर्घकाल तक वह सुखी रहता है। उसे हाथी, घोड़े, पालकी आदि का पूर्ण सुख प्राप्त हो और राजा भी उसका सम्मान करे। ऐसे मनुष्य देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त अर्थात् धार्मिक कार्यों में प्रवृत्त रहते हैं और कुएँ खुदवाना, प्याऊ लगवाना आदि कार्य करते रहते हैं। संक्षेप में चतुर्थ सुख स्थान है, इससे बन्धु, सुख, मकान, सवारी, जलकार्य आदि जितनी बातों का विचार किया जाता है उन सबका सुख जातक को प्राप्त होता है।
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