Praised by his younger brothers who have themselves attained glory, and endowed with valour that commands the admiration of others, the person born in the Saurya Yoga will shine like Sri Rama, fully engrossed in State affairs, fondled and loved by every body and exceedingly famous.
यदि तृतीय भाव में शुभ ग्रह हों या इस भाव को शुभ ग्रह देखते हों और तृतीय भाव का स्वामी अस्त न हो और अपनी राशि या उच्चराशि में स्थित होकर उत्तम स्थान में हो तो 'शौर्य योग' होता है। ऐसा व्यक्ति बहुत पराक्रमी होता है और उसके छोटे भाई यशस्वी और भ्रातृभक्त होते हैं। इसके भाई लोग जातक की प्रशंसा भी करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि तृतीय स्थान का — भाई-बहिन, पराक्रम सम्बन्धी पूर्ण सुख प्राप्त होता है। ऐसा व्यक्ति स्वयं भी बहुत यशस्वी होता है और राज्य-कार्य में निरत रहता है। फलितार्थ यह है कि अच्छे सरकारी ओहदे पर आसीन होता है। मन्त्रेश्वर महाराज ने तो यह भी लिखा है कि 'राम' के समान पराक्रमी हो — किन्तु इसे अर्थवाद समझना चाहिए।
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