In the case of Susubha, Subhakartari, Subhavesi and other Yogas the effects given for Sunapha and other Yogas caused by benefics should be adopted. In the case of Asubha, Papakartari, Papavesi and other Yogas caused by malefics, the effects will be just the contrary.
सुशुभ, शुभकर्त्तरी और शुभवेसि का फल, सुनफा आदि योगों के ही समान समझना चाहिये अर्थात् सुवेसि और सुशुभ का वही फल समझे जो सुनफा का; और शुभवासि का वही फल समझना चाहिये जो अनफा का। शुभ उभयचरी का फल दुरुधरा के समान समझना चाहिये। सूर्य के (१) आगे की राशि में, (२) पीछे की राशि में, (३) तथा दोनों ओर की राशियों में शुभ ग्रह होने से ही शुभ फल बताया है। यदि पाप ग्रह यह योग करें तो अशुभ फल समझना चाहिये अर्थात् शुभवेसि आदि का जो फल बताया है उससे बिल्कुल उलटा।
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