मासेइ्वराः सितकुजेज्यरवोन्दुसोरिचन्द्रात्मजास्तनुपचन्द्रदिवाकराः स्युः । स्त्रीणां विधोबं लमुशन्ति विवाहगर्भसंस्कारयोरितरकमंसु भर्त्तुरेव ॥ ९॥ अन्वयः--सितकुजेज्य रवीन्दुसौरिचन्द्रात्मजायः तनुपचन्द्रदिवाकरा:. (क्रमेण) रयो:स्त्रीणाँ विधोः बल॑ उशन्ति । इतरकर्मसु भर्तु: मासेश्वराः स्यः । विवाहगर्भसंस्का एवं विधो: बलम् (ग्राह्मम) || दे ।। पहिले मास का शुक्र, दूसरे मास का मंगल, तीसरे मास का बृहस्पति, चौथे मास का सूर्य, पाँचवें मास का चन्द्रमा, छठे मास का शन३चर, सातवें मास का बुध, आठवें मास का गर्भाधानलग्नेश, नवें मास का चन्द्रमा और दशवें मास का सूर्य स्वामी होता है। प्रयोजन यह है कि यदि मासेश्वर अस्त, निर्बल वा किसी अन्य ग्रह से पीड़ित हो तो गर्भपात हो जाता है । इसलिए पहिले ही उसका उपाय करे। अब स्त्रियों का चन्द्रबल कहते हैं । विवाह और गर्भसम्बन्धी संस्कारों में स्त्री कीजन्मराशि से अन्य यात्रादि कार्यों मेंस्वामी की जन्मराशि से और यदि पति मर गया हो तो यात्रादि कार्यों में भी स्त्री कीही जन्मराशि से चन्द्रबल विचारना चाहिए ॥। ९ ॥
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