Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 10
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

पूर्वोदिते: पुंसवर्न विधेयं मासे तृतीये त्वथ विष्णपुजा । मासे5ष्टंसे विष्णुविधातृजीवलंग्ने शुभ मृत्युगहे च शूद्धे ॥ १० ॥ अन्वयः--पूर्वोदितं: (सीमन्तोक्ते: तिथ्यादिभि:) तृतीये मासे पुंसवन विधेयम्‌, अथ अष्टमे मासे विष्णुविधात॒जीवेः: (नक्षत्रे) शुभे लग्ने मृत्युगृहे शुद्धे [सति] विष्णुपूजा (कार्या) ॥ १० ॥ सीमन्तोन्नयन मुह॒त्त में कहे हुए तिथि, वार, नक्षत्र और लग्न में तथा गर्भाधान से तीसरे मास में पुंसवन कर्म करना चाहिए। अब गर्भ की रक्षा के लिए विष्णुपूजा का मुह॒त्तं कहते हैं । श्रवण, रोहिणी और पुष्य नक्षत्र में; शुभ ग्रहों के दिन में; गर्भाधान से आठवें मास में; शुभग्रह से दृष्ट, युत वा शुभग्रह-सम्बन्धी लग्न में और लग्न से आठवें स्थान में किसी ग्रह के न रहते, दोपहर के पूर्व विष्णु की पूजा करनी चाहिए ॥ १०॥।

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