Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अन्वयः--शुचिशुक्र पौषतपसां मासानां दिगश्विरुद्राकंसंड्यसिततिथय:, तथा भूतादिब्वितयाष्टमी संक्रमर्ण चे ब्रतेष् अनध्याया: (भवन्ति) ॥| ५४ ॥। आषाढ़ शुक्ल दशमी, ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया, पौष शुक्ल एकादशी, माघ शुक्ल द्वादशी तथा चतुदंशी, पौर्णमासी, अमावास्या, परीवा, अष्टमी और सूर्य,संक्रान्ति ये सब यज्ञोपवीत में अनध्यायसंज्ञक हैं। इनमें यज्ञोपवीत न करना चाहिए ॥| ५४॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.