Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
विधौ सितांशगे सिते त्रिकोणगे तनो गुरो । समस्तवेदबिद् ब्रती यमांशगेडइतिनिधुणः ॥ ५३१ अस्बयः--विधो सितांशगे, सिते त्रिकोणगे, ग्रो तनौ, ब्रती समस्तवेदविद् भवति । यमांशगें अतिनिध् णः स्थात् ॥। ५३ ॥। यदि शुक्र के तवांश में चन्द्रमा, लग्न से पाँचवें वा नवें स्थान में शुक्र और लग्न में बृहस्पति हो तो बालक चारों वेदों का जाननेवाला होता है । यदि शनेश्चर के नवांश में चन्द्रमा, लग्न में ब्रहस्पति और लग्न से पाँचवें वा नवें स्थान में शुक्र होतो बालक निर्देय अथवा निलंज्ज होता है ।॥ ५३ ॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.