Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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शुक्रे जीवे तथा चन्द्र सुंयंभोमाकिसंयुते । निर्गुण: ऋरचेष्टः स्थान्निषणःसद्ुते पटुः ॥ ५२४ अन्वयः-शुक्रे, जीवे तथा चन्द्रे सूयेभोमाकिसंयुते ब्रती क्रमेण निर्गुण:, क्ररचेष्ट: तथा निघृ् णः स्थात् । सद्युते पटु: स्थात् ॥। ५२ ॥। यदि यज्ञोपवीतकाल में शुक्र, ब्रहस्पति व चन्द्रमा, इनमें से किसी ग्रह के साथ सूर्य होतो बालक निर्गुण, मज्भल हो तो निर्देय और शनेइचर हो तो निर्लज्ज होता है । शुभ ग्रहों का संयोग होने से सब विद्याओं में निपुण होता है ॥ ५२ ॥।
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