Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 51
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

लग्न, चोथे, सातवें और दशवें स्थान की केन्द्र संज्ञा है। सूर्य केन्द्र में स्थित हो तो जिसका यज्ञोपवीत किया जाय वह राजा का सेवक, चन्द्रमा केन्द्र में होतो वश्यवत्ति करनेवाला, मड्ल केन्द्र में होतो शस्त्रजीवी, बुध केन्द्र में हो तो अध्यापक, बृहस्पति केन्द्र में हो तो पण्डित, शुक्र केन्द्र मेंहो तोधनवान्‌ और दनदचर केन्द्र में हो तो म्लेच्छों कासेवक होता है ।। ५१ ॥।

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