Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वयः--कषणे, प्रदोषे, अनध्याये, शनौ, निशि, अपराहके, प्राकसंध्यागजिते तथा गलग्रहे व्रतबन्धः नेष्ट: स्थात् ।। ४८ ।॥। पञ्चमी तक को छोड़ क्ृष्णपक्ष, प्रदोष*, अनध्यायां, शनेहचर का दिन, रात्रि और दोपहर के बाद का समय, जिस दिन प्रात:काल मेघ गर्जे वह दिन और गलग्रह३, इनमें यज्ञोपवीत शुभ नहीं होता ॥| ४८ ।।
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