Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
यदि शाखेश का दिन हो; शाखेश ही की लग्त हो और शाखेश बली भी हो तो यज्ञोपवीत अति शुभ होता है। अथवा शाखेश, वर्णेश, सूर्य, चन्द्रमा और बृहस्पति बली हों तो भी यज्ञोपवीत शुभ होता है। यदि बृहस्पति वा शुक्र अपने बत्रु के स्थान में हों, अथवा युद्ध में किसी ग्रह से हार गये हैं अथवा अपने नीच स्थान में हों तो यज्ञोपवीत करने से वह बालक वेद ओर शास्त्र से तथा वेद-शास्त्र में कही हुई क्रिया से रहित होता है | ४४ ॥।
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