Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
जन्मक्षमासलग्नादो ब्रते विद्याधिको ब्रती। आद्यगर्भेषपि विप्राणां क्षत्रादीनामनादिमे ।। ४ धर अन्चयः--विप्राणां आद्यगर्भे, क्षत्रादीनां अनादिमेगर्भे अपि जन्मक्षेमासलग्नादो ब्रते (सति) ब्रती विद्याधिक: स्थात् ॥ ४५॥ जन्मनक्षेत्र, जन्ममास, जन्मलग्न और जन्मतिथि में ब्राह्मण के पहले लड़के का और क्षत्रियों तथा वेश्यों केपहले को छोड अन्य लड़के का यज्ञोपवीत हो तो वह अधिक विद्यावाला होता है ॥ ४५॥।
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