Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वय:--कवी ज्यचन्द्रलग्न पा: रिपौ मृतौ स्थिता ब्रते अधमा: भवन्ति, तथा अब्जभागंवा व्यये, तथा खला: तनो मृतौ सुते, स्थिता: अशुभाः भवन्ति ।। ४१॥। यज्ञोपवीत में लग्न से छठे वा आठवें स्थान में स्थित शुक्र, बृहस्पति, चन्द्रमा वा लग्नेश तथा बारहवें स्थान में स्थित चन्द्रमा वा शुक्र तथा लग्न में अथवा आठवें वा पाँचवें स्थान में स्थित पापग्रह अधम अर्थात् बालक के मरणकारक होते हैं ।। ४१ ।।
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