Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 40
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

हस्त, अद्विनी, पुष्य, तीनों उत्तरा, रोहिणी, आइलेषा, स्वाती, पुनर्वेसु, श्रवण; धनिष्ठा, शतभिष, मूल, मृगशिरा; रेवती, चित्रा, अनुराधा, तीनों पूर्वा और आर्द्रो नक्षत्र में; सूर्य, बुध, बृहस्पति, शुक्र वा चन्द्रमा के दिन में; दुइज, तीज, पठचमी, एकादशी, द्वादशी वा दशमी तिथि में; शुक्लपक्ष में, पञचमी तिथि पय॑न्‍्त क्रष्णपक्ष में भी दोपहर से पूर्व ही यज्ञोपवीत शुभ होता है ॥ ४० ||

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