Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 4
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

हस्तानिलाधिवपृगमैत्रवसु ध्रुवाख्य: शक्रान्वितं: शुभतिथों शुभवासरे च। स्‍्नायादथातंववती सृगपोष्णवायुहस्ताश्विधातुभिररं लभते च गर्भम्‌ ॥ ४॥ अन्वयः--हस्तानिलाश्वमृगमैत्रवसु ध्रुवाख्ये: शक्रान्वितं: शुभतिथोा च शुभवासरे आत्तंवती स्नायात्‌ (तथा) मृगपौष्णवायुहस्ताश्विधातृभि: (स्नातात्तेबवती ) अरं गर्भ लभते ॥| ४ ॥। हस्त, स्वाती, अश्विनी, मृगशिरा, अनुराधा, धनिष्ठा, रोहिणी, तीनों उत्तरा और ज्येष्ठा नक्षत्र में; शुभ तिथियों में अर्थात्‌ अमावास्या, चतुर्दशी, द्वादशी, नवमी, अष्टमी, छठि, चौथि--इन तिथियों को छोड़ अन्य तिथियों में; चन्द्र, बुध, बृहस्पति और शुक्रवार में पहिले पहिल रजस्वला हुई स्त्री स्नान करे । यदि मृगशिरा, रेवती, स्वाती, हस्त, अश्विनी वा रोहिणी नक्षत्र में स्नान करे तो शीघ्र हीगर्भवती हो ॥। ४ ॥।

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