Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 3
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

वेधतेष । दरश्शरिक्तासंध्याषष्ठीद्वादशी भद्ानिद्रासंक्रमे रोगेउष्टम्यां चन्द्रसूयोपरागे पाते चाह्य नोरजोदर्शनं सत्‌ ॥ ३॥ अन्वयंः--भद्वानिद्रासक्रम. दशेरिक्तासन्ध्याषष्ठीद्वादशीवंधतेषु, रोगे, अष्टम्यां, चन्द्रसू्योपरागे, पाते च आद्यं रजोदर्शेन नो सत्‌ ॥ ३ ॥ भद्रा में, सोते समय, संक्रान्तिकाल में, अमांवास्या में, चौथि, नवमी, चतुदंशी तिथि में, संध्याकाल में, छठि अथवा द्वादशी तिथि में, वेधृतियोग में, अष्टमी में, चन्द्रमा और सूर्य के ग्रहणकाल में तथा व्यतीपात में स्त्रियों का प्रथम रजोदशेन शुभ नहीं होता ॥ ३ ॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse