गणशबविष्णुवाग्रमाः प्रपुज्य पत्चमाब्दके तिथौ शिवाकंदिक्द्विषट्शरत्रिके रवावुदक् । लघुश्रवोनिलान्त्यभादितीशतक्षमित्रभे चरोनसत्तनो शिशोलिपिग्रह: सतां दिने ॥ ३७१ अन्वयः--पञ्चमाब्दके, शिवाकंदिग्द्विषट्शरत्रिके तिथौ रवौ उदक लघ्श्रवो5निलान्त्यभादितीशतक्षमित्रभे, चरोनसत्तनो, सतां दिने, गणेशविष्णवाग्रमा: प्रपूज्य, शिशो: लिपिग्रह: शुभ: स्यात् ।। ३७ ॥। जन्म से पाँचवें वर्ष में, एकादशी, द्वांदशी, दशमी, दुइज, छठि, पञचमी वा तीज तिथि में; उत्तरायण में सूर्य केरहते; हस्त, अश्विनी, पुष्य, श्रवण, स्वाती, रेवती, पुनवंसु, आर्द्रा, चित्रा या अनुराधा नक्षत्र में; चर अर्थात्, मेष, कक, तुला और मकर को छोड़ शुभग्रहों के लग्न में; शुभ ग्रहों केदिन में; गणेश, विष्णु, सरस्वती और लक्ष्मी की पूजा करके बालक,का अक्षरारम्भ शुभ होता है ॥ ३७ ।।
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