Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 38
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--म्‌गात करात्‌ श्रृतेः त्रये गुरुढ़ये, अकंजीववित्सिते अक्तलि, षट्शरत्निके शिवाकंदिगद्धिके त्िथौ, परे: ध्रुवान्त्यमित्रभे, शुभे: त्रिकोणकेन्द्रगं: अधीति: उत्तमा स्मृता ।। ३८ ॥। मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाती, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, अश्विनी, मूल, तीनों पूर्वा, पुष्य वा आश्लेषा नक्षत्र में; रविवार, बृहस्पति वा शुक्रवार में; छठि, पञचमी तीज, एकादशी, द्वादशी, दशमी वा दुइज तिथि में; लग्न से नवें, पाँचवें, पहिले, चौथे, सातवें और दशरवें शुभ ग्रहों के रहते विद्यारम्भ शुभ होता है । कोई आचार्य तीनों उत्तरा, रेवती और अनुराधा में भी विद्यारम्भ शुभ कहते हैं | ३८ ॥।

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