Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 34
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

दन्तक्षोौरनखक्रियात्र विहिता चौलोदिते वारभे पातंग्याररवीन्‌ विहाय नवमं घर च॒सन्ध्यां तथा । रिक्तां पवनिज्ञां निरासनरणग्रामप्रयाणोद्यतः स्‍्नाताभ्यक्तकृताशननंहि.पुनः कार्या हितप्रेप्सुभिः ॥ ३४॥। अन्वयः--पातंग्या ररवीन्‌ विहाय च नवम॑ घस्रं, सन्ध्यां, रिक्‍्तां पर्वनिशां विहाय, चॉलोदिते वारभे, दन्तक्षौरनखक्रिया- विहिता । अल्न निरासनरणग्राभप्रयाणोद्यत: स्नाताभ्यक्तकृताशने: हितप्रेप्सुभि: (जने:) दन्तक्षौरनखक्रिया नहि कार्या ॥ ३४ ॥। शनेरचर, मंगल, रविवार, क्षौर दिन से नवें दिन, संध्याकाल, चौथि, नवमी, चतुर्दशी, अष्टमी, पूर्णमासी, अमावास्या, सूर्यसंक्रान्ति और रात्रि को छोड़ मुण्डन में कहे हुए तिथि, वार, नक्षत्र और लग्न में दाँतों कोसाफ कराना, बाल बनवाना और नख कटाना शुभ कहा है । जिनको अपने हित की इच्छा हो वे बिना आसन के, रणभूमि में, किसी अन्य गाँव में, यात्रा की तैयारी कर चुकने पर, स्नान करके, उबटन या तेल लगाकर और भोजन करके उक्त तीनों काम न करें ॥ ३४॥।

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