Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 28
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

ते दशाहं दयोः प्रोक्‍्ते केश्चित्सप्तदिनं परे: । अ्यहं त्वात्ययिकेः्प्यन्य रर्धाहूं च॑ं ज्यहूं विधो: ॥ २८ ॥। अन्वयः--कंश्चित्‌ द्रभो: (गृरुशुक्रयो:) ते [बाल्यवाधके ] दशाहं प्रोक्‍्ते, परे: सप्तदिनं प्रोक्ते । अन्य: आत्ययिके [आवश्यके | त््यहं प्रोकत । विधो: च अर्धाहं बाल्यं, त्यहं वार्धक॑ (प्रोक्तम्‌) ।। २८ ।। कोई आचार्य शुक्र और बृहस्पति दोनों की बाल्य और वृद्धावस्था दश दिन की कहते हैं, कोई सात दिन की कहते हैंऔर कोई कहते हैंकि यदि किसी कार्य की अति आवश्यकता हो तो तीन ही दिन की मानना चाहिए । चन्द्रमा की बाल्यावस्था आधा दिन और वृद्धावस्था तीन दिन की होती है ॥। २८ ॥।

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