Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 27
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

पुरः पश्चाद्भगोर्बाल्यं त्रिदशाहं च वार्धकम्‌ । पक्ष पंचदिनं ते हे गुरोः पक्षमुदाहते ॥ २७१ अन्वयः--भगो: पुर: पश्चात्‌ (क्रमेण) त्रिदशाहं बाल्यं, पक्ष पञ्चदिनं च वार्धक (प्रोक्तम्‌ ) । ग्रोः ते द्वे [बाल्यवार्धक | पक्ष उदाहते ।। २७ ।। यदि शुक्र का उदय पूर्व दिशा में हो तोतीन दिन बाल और पन्द्रह दिन वृद्ध तथा पश्चिम में हो तो दश दिन बाल और पाँच दिन वृद्ध रहता है । बृहस्पति दोनों दिशाओं में उदय से पन्द्रह दिन तक बाल और अस्त से पूर्व पन्द्रह दिन वृद्ध रहता है ॥ २७ ॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse