Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 29
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

चूडावर्षात्ततीयात्प्रभवति विषमेष्ष्टाद्यरिक्ताकं षष्ठीपर्वोनाहे विचेत्रोदगयनसमये ज्ञेन्दृशक्रेज्यकानाम्‌ । वारे लग्नांशयोइच स्वभनिधनतनों नंधने शद्धियुक्ते शाकरोपेत विमेत्रम्दुचरलघुभरायषट त्रिस्थपा ं: ॥ २९॥ अन्वयः--तृतीयात्‌ वर्षात्‌ विषमे वर्ष, अष्टाद्यरिक्ताकंषष्ठीपर्वोनाहे, विचेत्नोदगयनसमये, श्ेन्दुशुक्रेज्यकानां वारे लग्नांशयोश्व, स्वभनिधनतनौ, नेधने शुद्धियक्ते (सति) शाक्रोपेतेः विमैत्रे: मृदुचरलघृभ:, आयषट्त्निस्थपापैः चूडा शुभा प्रभवति ।। २६॥। जन्म से अथवा गर्शाधान से तीसरे, पाँचवें, सातवें इत्यादि विषम वर्षो में, अष्टमी, द्वादशी, चौथि, नवमी, चतुर्दशी, परीवा, छठि, अमावास्या, पूर्णणासी और सूर्यसंक्रान्ति कोछोड़ अन्य तिथियों में; चेत्र महीने को छोड़ उत्तरायण में; बुध, चन्द्र, शुक्र ओर बृहस्पतिवार में; इन्हीं शुभग्रहों के लग्न वा नवांश में; जिसका मुण्डन कराना हो उसके जन्मलग्न वा जन्मराशि से आठवीं को छोड़ अन्य लग्न में; लग्न से आठवें स्थान में शुक्र को छोड़ अन्य ग्रहों के न रहते; अनुराधा को छोड़ ज्येष्ठासहित मृदु, चर, लघुसंज्ञक नक्षत्रों में अर्थात्‌ ज्येष्ठा, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, हस्त, अधश्विनी और पुष्य नक्षत्र में; लग्न से गेरहवें, छठे, तीसरे स्थान में पापग्रहों के रहते मुण्डन कराना शुभ होता है ॥ २९॥

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