Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 24
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

॥ अन्बयः--चेत्रपौषावमहरिशयनं, जन्ममासं, रिकतां च युग्माब्दं, जन्मतारां, एतान्‌ हित्वा, ऋतुम॒निवसृि: सम्मिते मासि अथों वा जन्माहात्‌ सूर्यभूषं: परिमितदिवसे, ज्ञेज्यशुक्रेन्दुवारे, अथ ओजाब्दे, विष्णयुग्मादितिमुदुलघुभ:, कर्णवेध: प्रशस्तः ॥| २४ ॥ चेत्र, पौष, तिथिक्षय, हरिशयन अर्थात्‌ आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कात्तिक शुक्ल एकादशी तक; जन्ममास अर्थात्‌ जन्मदिन से तीस दिन पर्यन्त, रिक्ता तिथि, सम वर्ष मौर जन्मतारा को छोड़कर जन्म से छठे, सातवें, आठवें महीने में, अथवा बारहवें या सोलह॒वें दिन, बुधवार, बृहस्पति, शुक्र, सोमवार में; और विषम वर्ष में; और श्रवण, धनिष्ठा, पुनर्वसु, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी और पुष्य नक्षत्र में बालक कां कर्णवेध शुभ होता है ।। २४ ॥॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse