Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 16
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

कवीज्यास्तच त्राधिमासे न पौष जल॑ पूजयेत्सूतिका मासपूर्ता । बुधन्द्वीज्यवारे विरिक्त तिथौ हि श्रुतीज्यादितोन्द्रकंन ऋत्यमंत्र: ॥ १६॥ अन्वयः--कवीज्यास्तचेत्राधिमासे, पौषे मासे, मासपूर्तां (अपि) सूतिका जल न पूजयेत्‌ । बूधन्द्वीज्यवारे विरिक्ते तिथौ श्रृतीज्यादितीन्द्रकन ऋत्यमैत्रे: जल॑ पूजयेत्‌ ॥ १६ ॥। बृहस्पति वा झुक़ के अस्त में तथा चेत्र, पौष, वा मलमास में सूतिका जल की पूजा न करे ओर बुधवार, सोमवार, ब्ृहस्पतिवांर में; चौथि, नवमी, चतु्देशी तिथि को छोड़ अन्य तिथियों में; श्रवण, पुष्य, पुनर्वेसु, मृगशिरा, हस्त, मूल, अनुराधा नक्षत्र में और पहिले महीने की समाप्ति में सूतिका जल की पूजा करे ॥ १६॥।

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