Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
सूर्य जिस नक्षत्र में स्थित हों उस नक्षत्र से पाँच नक्षत्र पर्यन्त बालक को झुलुआ पर चढ़ाकर झुलावे तो वह नीरोग हो, फिर पाँच नक्षत्रों मेंउस बालक का मरण हो, फिर पाँच नक्षत्रों में वहबालक दुबला हो, फिर पाँच नक्षत्रों मेंउसबालक के व्याधि हो और फिर सात नक्षत्रों में उसबालक को सौख्य हो ।। १४ ॥!
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