Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 12
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

पौष्णभ्रुवेन्दुकरवातहयेषु सूती- स्नान समित्रभरवीज्य कुजष शस्तम । नार्द्ात्रयश्रुतिमघान्तकमिश्रमूल त्वाष्ट्र ज्सोरिवसुषडुविरिक्ततिथ्याम्‌ | १२॥। अन्वयः--समित्र भरवीज्यकुजेषु, पौष्णधुवेन्दुकरवातहयेषु, सूतीस्नानं॑ शस्तम्‌; आद्रान्नियश्रुतिमधान्तकमिश्रमूलत्वाष्ट्रे ज्ञसौरिवसुषड़विरिक्ततिथ्यां सूतीस्नान न शस्तम ॥। रेवती, तीनों उत्तरा, रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, स्वाती, अश्विनी और अनुराधा नक्षत्र में, रविवार, मज्जल वा बृहस्पतिवार में प्रसूता स्त्री का. स्नान करना शुभ है। आर्द्रा, पुनवंसु, पुष्य, श्रवण, मघा, भरणी, विज्ञाखा कृत्तिका, मूल और चित्रा नक्षत्र में; बुध और शनिवार में; अष्टमी, छठि द्वादशी, चौथि, नवमी और चतुर्दशी तिथि में प्रसूता स्त्री स्नान न करे इनमें स्नान करने से फिर सन्तान नहीं होती ॥ १२॥

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