Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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अव्व्यादिर्प॑ तुरगास्ययोनिक्षुरोनएणास्यमणीगृह च । पृषत्कचक्रे भवन च मच्चः शय्याकरों मौक्तिकविद्रमं च ॥ ५८४ घोड़े केमुख केसदृश अशिवनी, योनि के सदृश भरणी, छुरा के सदुश कृत्तिका, गाड़ी के सदृश रोहिणी, हरिण के मुख के सदृश मृगशिरा, मणि के सदृश आर्द्रा, घर के सदृश पुनर्वसु, बाण के सदृश पुष्य, चक्राकार आइश्लेषा, घर के समान मघा, मचान के सदुश पूर्वाफाल्गुनी, खाट के सदृश उत्तराफाल्गुनी, हाथ के सदृश हस्त, मोती के सदृश चित्रा, मूँगा के सद॒श स्वाती,
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