Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 59
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

तोरणं बलिनिभं च कुण्डल सिहपुच्छणजदन्तमच्चकाः । व्यक्ति च त्रिचरणाभम्दलो वत्तमच्यमलाभमदंलाः ॥| ५९॥ अन्वयः--तु रगास्ययोनिक्षुरः, अनः, एणास्यमणि:, गृहं च, पृषत्कचक्रे भवनं च, मज्च:, शय्या, करः, मौक्तिकविद्रुमं च, तोरणं, बलिनिभं च, कुण्डलं, सिहपुच्छगजदन्तमञचका:, ल्यस्त्रि च,त्रिचरणाभमर्दलः, वृत्तमञचयमलाभमदेला: [एतत्‌ | अश्व्यादिरूपं (ज्ञेयम )॥ ५८-५८ ।। तोरण के सदृश विशाखा, भात के ढेर के सदृश अनुराधा, कुण्डल के सदृश ज्येष्ठा, सिह की पूँछ के सदृश मूल, हाथी-दाँत के सदृश पूर्वाषाढ, मचान के सदृश उत्तराषाढ़, त्रिकोणाकार अभिजितू, वामन भगवान्‌ के सदृश श्रवण, नगाड़ा के सदृश धनिष्ठा, मण्डलाकार शतभिष, मचान के सदृश पूर्वाभाद्रपद, जुड़े हुए दो नक्षत्र उत्तराभाद्रपर और नगाड़ा के सदश रेवती है ॥ ५८-५९॥

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