Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
अश्विनी, पुष्य, हस्त, आश्लेषा, मूल, ज्येष्ठा, श्रवण, आं्द्रा और स्वाती नक्षत्र में प्रेतक्रिया करना योग्य है, यदि मरणकाल में किसी कारणवश से न की गई हो । धनिष्ठा नक्षत्र का उत्तरार्ड, शतभिष, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती इन साढ़े चार नक्षत्रों में प्रेत कादाह, दक्षिण दिशा की यात्रा, खाट बिनाना और घर छवाना वर्जित है ।॥। ४८ ||
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.