Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 43
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

त्यक्त्वाष्टभूतशनिविष्टिकुजान्‌ जनुभेंमासो मृतौ रविविध्‌ अपि भानि नाड्थः । दनड्रोचरे तनुलबे शशिजीवताराशुद्धा करादितिहरीन्द्रकपे परीक्षा ॥ ४३४ अन्वयः-अष्टभूतशनिविष्टिकुजान्‌ू, जनुर्भमासो, मृताौँ रविविधू, अपि नाड्या: भानि त्यक्त्वा, इचज्रे चरे तनुलवे, शशिजीवताराशुद्धी, करादितिहरीन्द्रकपे, परीक्षा (कार्या) ॥ ४३ ॥। अष्टमी, चतुर्दशी, शनइचर, मंगल, भद्रा, जन्मनक्षत्र, जन्म मात, आठवाँ सू्यं, आठवाँ चन्द्रमा, जिस नाड़ी में जन्मनक्षत्र हो उस नाड़ी के सब नक्षत्र, इन सबको छोड़कर हस्त, पुनर्वसु, श्रवण, ज्येष्ठा, शतभिष नक्षत्र में; मिथुन, कन्या, धन, मीन, मेष, कक, तुला, मकर लग्न में और इन्ही राशियों के नवांश में; चन्द्रमा और बृहस्पति का गोचर शुद्ध तथा ताराशूद्धि रहते परीक्षा अर्थात्‌ सत्यासत्य के निर्णय के लिये लोहे का गरम गोला आदि उठवाना शुभ होता है ॥ ४३ ॥।

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