Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 44
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः-व्ययाष्टशुद्धोपचये लग्नगे शुभदृग्युते, त्िषड्दशायस्थे चन्द्रे सर्वारस्भ: प्रसिद्धधति ।| ४४ ।। शुभ लग्न से बारह॒वाँ और आठवाँ स्थान शुद्ध हो, अर्थात्‌ किसी शुभा ग्रह से युक्त नहो। कर्त्ता केजन्मराशि वा जन्मलग्न से तीसरी, छठी, गेरहवीं, दशवीं इनमें से कोई लग्न हो और शुभग्रहों से युक्त अथवा दुष्ट हो। तब चन्द्रमा लग्न से तीसरे, छठे, दशवें, गेरहवें इनमें सेकिसी स्थान में हो सम्पूर्ण शुभ कर्मों का आरंम्भ शुभदायक होता हैं ।। ४४ ॥।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse