Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 36
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

सेका तिथिर्वारयुता कृताप्ता शष गुण$5अ्र भुवि वह्निवासः । सौख्याय होमे शशियुग्मशेष प्राणा्थंनाशौं दिवि भूतले च ॥ ३६॥ अन्वयः--तिथि: सेका वारयुता कताप्ता गुणे5भ्रें शेषे भुवि वह्लित्रास: (ज्ञेय:), होमे सौख्याय च (तथा) शशियुग्मशेषे (क्रमेण) दिवि भूतले वह्तिवासो (ज्ञेयः) [तत्र होमे | प्राणार्थनाशौ (भवतः) ॥ ३६ ।। शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से लेकर इष्टेतिथिपयेन्त गिनने से जितनी संख्या हो उसमें एक और जोड़े, फिर रविवार से लेकर इष्टवारपयंन्त गिनने से जितनी संख्या हो उसको भी उसी में जोड़े ।उस अडूू में चार का भाग दे । यदि तीन अथवा शून्य शेष रहे तो अग्नि का वास भूमि में जाने। वह सौख्यकारक होता है । यदि एक शेष हो तो अग्नि का वास आकाश में जाने। वह होम करनेवाले के प्राण का नाश करता है और यदि दो शेष रहें तो अग्नि का वास पाताल में जाने । वह धन की हानि करता है ॥ ३६ ॥

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