Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
नवाज्न॑ स्थाच्चरक्षिप्रमदुभे सत्तनो शुभम् । नन््दाविषघटीमधुपौषाकिभूमिजान् ॥ ३७ ॥ बिना अन्वयः--च रक्षिप्रमृदुभे, सत्तनों, नन््दाविषघटीमधपौषाक िभूमिजान् विना नवाज्ने (शुभं )स्थात् ॥।| ३७ ।। पुष्य, हस्त, चित्रा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, पुनर्वसु, स्वाती, अश्विनी, अनुराधा, मृगशिरा और रेवती नक्षत्र में शुभग्रहों से युक्त वा दुष्ट छुभग्रहों के लग्न में, परीवा, छठि, एकादशी तिथि, विषघटी, पूस और चत्रमास, और मास में नवान्नमज्भल और शनैहचर दिन को छोड अन्य तिथि, वार भक्षण शुभ है॥ ३७॥।
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