Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 34
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अश्विनी, पृष्य, हस्त, तीनों उत्तरा, रोहिणी, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा शतभिष, पुनर्वसु, स्वाती, अनुराधा और मघा नक्षत्र में; रिक्ता, अष्टमी, पूर्णणासी, अमावस, सूर्य-संक्रान्ति, रविवार, मज्जुल, शनेरचर को छोड़ अन्य तिथियों और दिवसों में; लग्न से दशर्वे स्थान में सूर्य, चौथे स्थान में चन्द्रमा और लग्न में बृहस्पति के रहते मजझ्ल अर्थात्‌ गणंशादि की पूजा, पौष्टिक अर्थात्‌ पृष्टिकामना से कोई पुरश्चरणादि और मूलशान्ति आदि करना शुभ है। बृहस्पति, शुक्रास्तादि और केतूदयादि उत्पात के समय को छोड़कर उक्त मुहत्तं मिलि तो बहुत उत्तम है ॥| ३४ ॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse