मिश्रोग्ररोद्रभुजगेन्द्रविभिन्न भेषु कर्काजतौलिरहिते च तनो शुभाहे । धान्यस्थिति: शुंभकरी गदिता श्रुवेज्यद्वीशन्द्रद्नचरभेष॒ च॒ धान्यवद्धि: ॥ १३॥ अन्वयः-मिश्रोग्ररौद्रभुजगेन्द्रविभिन्नमेषू च._ (तथा) कर्काजतौलिरहिते तनौ, शुभाहे धान्यस्थिति: शुभकरी गदिता | च [पुनः | धुवेज्यद्वीशेन्द्रदत्नचरभेष् धान्यवृद्धि: शभकरी गदिता ॥| ३३ ॥। विशाखा, कृत्तिका, तीनों पूर्वा, भरणी, मघा, आर्द्रीि, आश्लेषा और ज्येष्ठा कोछोड़ अन्य नक्षत्रों में; कर्क, मेष और तुला को छोड़ अन्य लग्नों में; सोम, बुध, शुक्र और बृहस्पति के दिन में धान्यस्थिति अर्थात् अन्न का रखना शुभ होता है। तीनों उत्तरा, रोहिणी, पुष्य, विशाखा, ज्येष्ठा, अदिवनी, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, पुनर्वसु और स्वाती नक्षत्र में धान्यवृद्धि अर्थात् डेढी और सवाई पर अनाज देना शुभ है ॥ ३३ ॥।
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