Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 32
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

भाग्यायंमश्रुतिमघन्द्रविधातृ मूलमैत्रान्यभेष कथितं कणमर्दनं सत्‌ । द्वीशाजपान्निऋतिधातृशतायं मक्षें सस्यस्य रोपणहिमाकिकुजो विना सत्‌ ॥ ३२॥। अन्वयः-भाग्याय मश्रृतिमघेन्द्रविधातुमूलमैत्रान्त्यभेषु, कणमर्देन सत्‌ कथितम्‌ । द्वीशाजपांन्निऋतिधातृशतायंमक्षें, आकिकुजौ विना सस्यस्थ रोपणं सत्‌ ॥| ३२॥। पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, श्रवण, मधा, ज्येष्ठा, रोहिणी, मूल, अनुराधा और रेवती नक्षत्र में कणमर्दन अर्थात्‌ खरिहान में अनाज का पीटना अथवा माड़ना शुभ है। विशाखा, पूर्वाभाद्रपद, मूल, रोहिणी, शतभिष और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में; शनेश्चर और मंगल को छोड़ अन्य दिनों में; खेतों में धान का लगाना शुभ है ॥ ३२ ॥

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