Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 31
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

तीक्ष्णजपादकर वह्लिवसु श्रुतीन्दुस्वातीमघोत्तरजलान्तकतक्षपुष्ये । मन्दाररिक्तरहिते दिवसे४तिशस्ता धान्यच्छिदा निगदिता स्थिरभ विलरने ॥ ३१ ॥। अन्बयः- तीक्ष्णाजपादकरवह्लिवस्‌श्रुतीन्दुस्वांती मघोत्त रजलान्तकतक्षपुष्ये, मन्दारिक्तरहिते दिवसे, स्थिरभे विलग्ने धान्यच्छिदा अतिशस्ता निगदिता ॥| ३१॥। मूल, ज्येष्ठा, आर्द्री, आइलेषा, पूर्वाभाद्रपद, हस्त, क्ृत्तिका, धनिष्ठा, श्रवण, मृगशिरा, स्वाती, मघा, तीनों उत्तरा, पूर्वाषाढ़, भरणी, चित्रा और पुष्य नक्षत्र में; शनेइ्चर, मंगल दिन और रिक्‍ता तिथि को छोड़ अन्य दिन और तिथि में और स्थिर लग्न में अनाज का काठना शुभ होता है ॥ ३१॥।

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