Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 25
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

मित्राक प्रूववासवाम्बुपमघातोयान्त्यपुष्येन्दुभिः पापहोनबलेस्तनौ सुरगुरो ज्ञे वा भुगों खे विधों। आप्ये सबंजलाशयस्य खनन व्यस्भोमघ:ः सेन्द्रभ- स्तनत्यंहिबुके शुभस्तनुगृहेशे5ब्जे ज्ञराशों शुभम्‌ ॥ २५॥ अन्वयः--मित्राक ध्रुववासवाम्बुपमघातोयान्‍्त्यपुष्यन्दुभि:, पापैः हीनबले:, तनो सुरग्रौज्ञे वा, खे भूगो, आप्ये विधो, सर्वजलाशयस्य खनन शुभम्‌ । व्यम्भोमघ: सेन्द्रभ : (पूर्वोक्‍्तनक्षत्रे:), हिबुके शुभे:, तन्‌गृहे जे, ज्राशों अब्ज नृत्य शुभम्‌ ॥ २५॥ अनुराधा, हस्त, तीनों उत्तरा, रोहिणी, धनिष्ठा, शतभिष, मघा, पूर्वाषाढ़, रेवती, पुष्य और मृगशिरा इन नक्षत्रों में, पापग्रहों के निर्बल रहते, लग्न में बृहस्पति वा बुध के रहते, लग्न से दशर्वे स्थान में शुक्र के रहते, जल-राशियों में चन्द्रमा के रहते वापी, कूप, तड़ाग आदि जलाशयों का खनना शुभ है। पूर्वोक्त नक्षत्रों में पूर्वाषाढ़ और मघा को छोड़कर, ज्येष्ठा कोमिलाकर अर्थात्‌ अनुराधा, हस्त, तीनों उत्तरा, रोहिणी, धनिष्ठा, शतभिष, रेवती, पुष्य, मृगशिरा और ज्येष्ठा इन नक्षत्रों में, लग्न से चौथे स्थान में शुभग्रहों के रहते, शुभग्रहों से दृष्ट लग्न में बुध के रहते और मिथुन या कन्याराशि में चन्द्रमा केरहते नाचने का आरम्भ करना शुभदायक होता है ॥ २५॥

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse