Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्बयः--उत्तरात्न वरोहिण्य: भास्कर: च श्रुवं [ ध्रुवसंज्ञ ]स्थिरं [स्थिरसंज्ञऊ्च ] तत्न स्थिरं [स्थिरकर्म ]वीजगहशान्त्यारामादिसिद्धये (भवति) ॥| २।॥। उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तरभाद्रपद, रोहिणी ये चार नक्षत्र और रविवार इनकी ध्रुव और स्थिर संज्ञा है। इनमें स्थिर कार्य, बीज बोना, घर बनवाना व शान्ति करना, गाँव के समीप बगीचा लगवाना और आदि शब्द से मृदुसंज्ञक नक्षत्रों काभी कार्य करना चाहिए ॥| २॥
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