Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
स्वात्यादित्ये श्रतेस्त्रीणि चन्द्रत्चापि चरं चलम् । तस्मिन गजादिकारोहो वाटिकागमनादिकस् ॥ ३॥। अन्वयः-स्वात्यादित्ये श्रुतेः त्रनीण (तथा) चन्द्र: चरं, चलं च (संज्ञ ज्ञेयम) तस्मिन् गजादिकारोहो वाटिका-गमनादिकम (शुभं भवति) ।॥| ३॥ स्वाती, पुनवेसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष ये पाँच नक्षत्र और सोमवार इनकी चर और चल संज्ञा है। इनमें हाथी, घोड़े आदि पर चढ़ना, बगीचा लगाना, यात्रा करना, और आदि हाब्द से लघुसंज्ञक नक्षत्रों का भी कार्य करता शुभ है ।॥ ३॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.