Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 16
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

क्रयक्षें विक्रयो नेष्टो विक्रयक्षें क्रमोषपि न। पौष्णाम्बुपाश्विनीवातश्रवध्चित्रा: क्रये शुभाः॥ १६४ धक्षेंविक्रयो नेष्ट:, विक्रयक्षें क्रपः अपि न, पौष्णाम्बुपाश्विनीयातअन्वयः--क्र श्रवश्चित्रा: क्रय शुभा: ॥ १६ ।। मोल लेने के मुहूर्त में बेचना शुभ नहीं है और बेचने के मुहूत्ते मेंमोल लेना शुभ नहीं है ॥ यद्यपि मोल लेनेवाला बेचनेवाले के मुहूत्त में मोल नहीं लेगां तो बेचनेवाला किस के हाथ बेचेगा, और बेचनेवाला मोल लेनेवाले के मुह॒त्त में बेचेगा नहीं तो मोल लेनेबाला क्‍्यां मोल लेगा । इस रीति से दोनों कार्य नहीं हो सकते तथापि आवश्यकता के कारण किसी एक के मुहूत्त का विचार न करने से दूसरे का कार्य हो सकता है; यही इसका तात्पय है । रेवती, शतभिष, अश्विनी, स्वाती, श्रवण, चित्रा ये नक्षत्र मोल लेने में शुभ होते हैं ।। १६ ॥।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse