Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 15
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अदिविनी, पुष्य, हस्त, चित्रा, मृगशिरा, अनुराधा, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, स्वाती, पुनर्वसु, मूल इन नक्षत्रों में; द्विस्वभाव लग्न में; शुक्र, चन्द्रमा, बृहस्पति और बुध लग्न में हों; शुक्र, चन्द्रमा, बृहस्पति, बुध, वा रविवार हो, लग्न से बारहवें, सातवें, आठवें स्थान में कोई ग्रह न हो; रिक्ता और अमावस को छोड़ अन्य शुभ तिथियाँ हों तोऔषध,का सेवन करना शुभ है । परन्तु जन्मनक्षत्र न'हो । पुनर्वेसु, धनिष्ठा, चित्रा, अनुराधा, अश्विनी इन नक्षत्रों मेंसिलाई के काम शुभ हैं | १५॥।

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