Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 14
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

लग्ने शुभे चाष्टमशुद्धिसंयुते रक्षा पश्चूनां निजयोनिभ चरे। रिक्ताष्टमीदश्शकुजश्रवो ध्र॒वत्वाष्ट्रेषु यान॑ स्थितिवेशनं न सत्‌ ॥ १४ ॥ अन्वयः--अष्टमशुद्धिसंयुते शुभे लग्ने, च (तथा) निजयोनिभे, चरे, पशूनां रक्षा सत्‌ । रिक्ताष्टमीदर्शकुजश्न वोध्रुवत्वाष्ट्रेषु पशूनां यान, स्थितिवेशनं न सत्‌ ॥। १४ ॥। शुभ लग्न हो, लग्न से आठवें स्थान में कोई ग्रह न होओर अपनी योनि का नक्षत्र हो तब पशुओं को पालना चाहिए अथवा चर अर्थात्‌ स्वाती, पुनर्वंसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, इन नक्षत्रों में पशुओं को पालना चाहिए। चौथि, नवमी, चतुर्दशी, अष्टमी, अमावस, मंगल दिन, श्रवण, तीनों उत्तरा, रोहिणी और चित्रा नक्षत्र में पशुओं को घर से बाहर ले जाना, गोष्ठ में बाँधघना और बाहर से घर में लाना शुभ नहीं है ॥ १४ ॥।

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