Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
विप्राज्ञया तथोढ्वाहे राज्ञा प्रीत्यापितं च यत् । निन््धे5षपि धिष्ण्ये वारादों धाय॑ वस्त्र जगुबंधा: ॥ १२॥ अन्वयः--विप्राज्ञया, तथा उद्बाहे, राज्ञा प्रीत्यापित च यत् वस्त्र (तत्) धिष्ण्ये वारादो निन्येपि धाय॑ (इति) बुधा: जगुः ॥। १२ ॥ ब्राह्मण की आज्ञा से, विवाह में और प्रीतिधूर्वक राजा के दिये हुए ब्त्र को निद्य भी नक्षत्र और वारादि में धारण करना चाहिए, यह पण्डित लोग कहते हैं ॥ १२॥।
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