Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 11
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

यदिं कदाचित्‌ पहिनने के दिन नवीन वस्त्र कहीं जल जाय, अथवा फट जाय, अथवा गोबर या कीचड़ लग जाय तो उस ब्त्र में नव भागों की कल्पना करके चारों कोणों के भागों में देवताओं की, मध्य के तीन भागों में राक्षसों की और दोनों छोरों के दोनों मध्य भागों में नरों की कल्पना करे । यदि राक्षसभागों में दाहादि हो तो वस्त्र शुभ नहीं होता अर्थात्‌ मरणकारक होता है, और यदि देव-मनुष्यभागों में, दाहादि हो तो शुभ होता है, भोग और पुत्र प्राप्तिकारक होता है ।यदि राक्षस, देवता, मनुष्य, इन तीनों के भागों में दाहादि हो तो बह वस्त्र शुभकारक नहीं होता ॥| ११॥।

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