Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 55
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

कालहोरा वारादेघंटिका दिध्नाः स्वाक्षहच्छंषर्बाजता: । संकास्तष्टा नगेः कालहोरेशा दिनपात्‌ क्रमात्‌ ॥ ५५॥ अन्वयः--वा रादे: घटिका: द्विध्ता:, स्वाक्षहच्छे षवर्जिता:, सैका:, नगे तष्टा:, दिनगत्‌ कमात्‌ कालहोरेशा: (भवन्ति) ॥ ५५॥ । वारप्रवृत्तिकाल से लेकर इष्टकालपयं॑न्त जित ने दण्डादि हों उनको दो से गुणा करके दो जगह रक्‍खे । एक स्थान में पाँच का भाग देकर जो शेष रहे उसे दूसरे स्थान में घटावे । जो शेष रहे उसमें एक और जोड़ दे तब नात का भाग देने से जो शेष रहे वह दिवस के स्वामी के क्रम से कालहोरेश होगा ॥। ५५॥

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