Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
होरासिद्धि के लिये वारप्रवृत्ति पादोनरेखापरपूर्वयो जन: पलेयूतोनास्तिययो दिनार्धतः । ऊनाधिकास्तहिवरो-उ्गूवः: पलेरूध्व तथाइधो दिनपप्रवेशनम् ॥ ५४॥। अन्वयः--पादोनरेखाप रपूर्वयो जनै: पलै: युतोना: तिथयः (पञचदश ) यदि दिनाधरेत: ऊनाधिका (तदा ) तद्विवरोडडूवे: पल: ऊर्ध्व तथा अध: दिनप्रवेशनम् (स्थात्) ।। ५४ ॥। लड्भा से लेकर उज्जयिनी और कुरुक्षेत्रादि देश तथा सुमेरुपबेतपर्यन्त भूमध्यरेखा कही जाती है । जिस देश में वारप्रवत्ति जानना हो वह देश उक्त रेखा से पूर्व यापश्चिम जितने योजन पर हो, उन योजनों में उन्हीं का चतुर्थाश घटाकर जितने शेष रहें उन्हें पल मानकर, इष्ट देश यदि रेखा से पद्चिम हो तो पन््द्रह में जोड़े और पूर्व होतो घटावे । इसे ही होरासिद्धि की वारप्रवृत्ति कहते हैं ॥ ५४॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.