Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
मकर में स्थित बृहस्पति के परिहार रेवापूर्षे गण्डकीपश्चिमे च शोणस्योदग्दक्षिणं नीच इज्यः । वर्ज्यों नायं कौड्भूण मागधे च गौड सिन्धों व्जनीयः शुभेषु ॥ ५२ ७ अन्वयः--रेवापूर्व, गण्डकीपश्चिमे, शोणस्य उदकदक्षिणे [तीरे] नीच: इज्यः न वज्यं: । कौंकणे, मागधे, गौडे च (तथा) सिन्धौ (देशे) अयं शुभेषु वर्जनीय: (स्थात्) ॥ ५२॥। नमंदा नदी के पूर्व, गण्डकी नदी के पश्चिम और शोणनद के उत्तर तथा दक्षिण देशों में मकरराशिस्थित बृहस्पति विवाहादि शुभ कार्यों में वर्जनीय नहीं है, किन्तु कोड्भुण, मागध, गौड और सिन्धु देश में शुभ कार्यों में वरजित हैं ॥ ५२॥।
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